अनुरक्ति



  1. एक कठपुतली सी हु मैं तेरे हाथों की , तेरे ईशारों पर चलना मुझें आज भी अच्छा लगता हैं ।

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  1. कठपुतली को जब नचाने वाले हाथों से ही इश्क हो जाय, तो उसका हर आदेश ही सच्चा लगता है।

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